Monday, November 29, 2021

क्या सैनिटरी नैपकिन यूज करने से होता है Cancer? मेन्स्ट्रुअल हाइजीन के इन टिप्स को अपनाएं


नई दिल्ली: 11-12 साल की उम्र से जब से एक लड़की के पीरियड्स शुरू होते हैं तब से हर महीने माहवारी (Periods) के दौरान उसे जिस एक चीज पर पूरी तरह से निर्भर रहना पड़ता है वह है- सैनिटरी नैपकिन या पैड. आजकल टैम्पोन्स (Tampons), मेन्स्ट्रुअल कप (Menstrual Cup) जैसे कई विकल्प मार्केट में मौजूद है. बावजूद इसके बड़ी संख्या में महिलाएं अब भी माहवारी के दौरान कपड़ा या सैनिटरी नैपकिन ही इस्तेमाल करती हैं. ऐसे में यह जानना आपके लिए भी बेहद जरूरी है कि क्या सचमुच सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करने से कैंसर (Cancer) का खतरा हो सकता है?

सिंथेटिक सैनिटरी नैपकिन से हो सकता है नुकसान

कुछ गाइनैकॉलजिस्ट्स का कहना है कि सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करने की वजह से सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) या ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) होता है, यह बात पूरी तरह से गलत है और इस दावे को साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक तथ्य या रिसर्च भी मौजूद नहीं है. हालांकि अन्य डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स की मानें तो इन दिनों मार्केट में प्लास्टिक और सिंथेटिक सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Napkin) काफी बिक रहे हैं और इनके इस्तेमाल से जेनाइटल कैंसर का खतरा हो सकता है. इसका कारण ये है कि सिंथेटिक (Synthetic) सैनिटरी नैपकिन में अवशोषण करने वाले एजेंट के रूप में डायॉक्सिन (dioxin) केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जो समय के साथ धीरे-धीरे शरीर में जमा होने लगता है. इसकी वजह से सर्वाइकल कैंसर या ओवेरियन कैंसर का खतरा हो सकता है.

ये भी पढ़ें- पीरियड्स के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान, नहीं होगी परेशानी

खुजली-एलर्जी के साथ ही कमजोर इम्यूनिटी का भी खतरा

WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने भी डायॉक्सिन को प्रदूषक और कैंसरकारी माना है जिसकी वजह से शरीर में सिर्फ खुजली या एलर्जी (Allergy) की दिक्कत नहीं होती बल्कि कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं. साथ ही डायॉक्सिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी दबाने का काम करता है. इस वजह से इंफेक्शन्स होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. लिहाजा पीरियड्स के दौरान सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करते वक्त अगर साफ-सफाई से जुड़े इन टिप्स का ध्यान रखा जाए तो आप बीमार पड़ने से बच सकती हैं:

ये भी पढ़ें- पीरियड्स में गड़बड़ी बन सकती है इस बीमारी की वजह, वक्त रहते करें पहचान

– पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग ज्यादा हो रही हो या कम 3 से 4 घंटे में एक बार सैनिटरी नैपकिन जरूर चेंज करें. लंबे समय तक एक ही नैपकिन यूज करने की वजह से भी बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial Infection) या दूसरी बीमारियों का खतरा हो सकता है.

– बायोडिग्रेडेबल, केमिकल फ्री और ऑर्गैनिक (Organic) सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करें. ऐसे सैनिटरी नैपकिन जिसमें खुशबू (Fragrance) हो उसे यूज न करें.

– पीरियड्स के दौरान प्यूबिक एरिया की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें. 

– अगर रीयूजेबल सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल कर रही हों तो उसे पहले अच्छी तरह से धोकर साफ कर लें ताकि इंफेक्शन का कोई खतरा न रहे.

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