Tuesday, May 17, 2022

दिल्ली में नल के पानी की पहुंच से जुड़ा है Dengue इंफेक्शन का खतरा, नई स्टडी का दावा


नई दिल्ली: दिल्ली में मच्छरों से होने वाली बीमारी डेंगू (Dengue) का प्रकोप हर साल देखने को मिलता है और बड़ी संख्या में लोग बीमार हो जाते हैं. साल 2020 में दिल्ली में डेंगू के 1 हजार से ज्यादा केस सामने आए थे. अब एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नल के पानी की पहुंच (Tap Water Access) इस बात की भविष्यवाणी कर सकती है कि उस इलाके के लोगों को डेंगू होने का खतरा कितना अधिक है. इस स्टडी की मदद से नई रणनीति बनायी जा सकती है ताकि शहरी इलाकों में जानलेवा वायरस को फैलने से रोका जा सके. 

3.5 बिलियन लोगों पर डेंगू संक्रमण का खतरा

दिल्ली के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च के एक वैज्ञानिक विक्रम कुमार की मानें तो मच्छर से होने वाली बीमारियों के मामले में दुनियाभर में डेंगू का वायरस (Dengue Virus) सबसे ज्यादा तेजी से फैल रहा है क्योंकि इस वायरस ने शहरी इलाकों में फैलने के लिए खुद को रुपांतरित कर लिया है. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में करीब 3.5 बिलियन लोगों को डेंगू वायरल संक्रमण (Viral Infection) का खतरा है जो शहरीकरण की बढ़ती दरों के साथ तेजी से फैल रहा है.  

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7.6% लोगों में डेंगू वायरस एंटीबॉडीज मिले

मौजूदा स्टडी को PLOS नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज नाम के जर्नल में प्रकाशित किया गया है जिसमें वैज्ञानिकों ने दिल्ली में डेंगू वायरस के संपर्क में आने के सामाजिक और वातावरण से जुड़े जोखिम कारकों (Risk Factor) की जांच की. इस दौरान अनुसंधानकर्ताओं ने 2107 लोगों में डेंगू एंटीबॉडीज को मापा और दिल्ली शहर के अंदर ही 18 इलाकों में मच्छर के लार्वा की मौजूदगी की जांच की. इस विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा कि सर्वे में शामिल 7.6 प्रतिशत लोग डेंगू वायरस एंटीबॉडीज (Antibodies) के लिए पॉजिटिव पाए गए जो इस बात की ओर इशारा करता है कि इन लोगों को कुछ दिनों पहले या हाल के दिनों में डेंगू इंफेक्शन हुआ था.   

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जहां नल के पानी की सुविधा नहीं, वहां वायरस का जोखिम अधिक

स्टडी में यह भी पाया गया कि दिल्ली की जिन कोलोनियों में नल के पानी की सुविधा नहीं है, (करीब 61 प्रतिशत से कम घर ऐसे हैं जहां नल के पानी की पहुंच है) उस कॉलोनी के लोगों में वायरस के संपर्क में आने का जोखिम काफी अधिक था. रिसर्च के मुताबिक, ये उस तरह की कोलोनियां या क्षेत्र थे जहां महामारी के बीच भी डेंगू केस रेजिस्टर किए गए. 

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डेंगू केस में कमी के लिए नल के पानी की पहुंच बढ़ाने की जरूरत

वैज्ञानिकों की मानें तो मच्छरों की आबादी या घनत्व का पता लगाने के लिए लार्वा मच्छर सूचकांक का उपयोग करने की भी एक सीमा है क्योंकि ‘डेंगू की घटनाओं की भविष्यवाणी करने में इन आंकड़ों या सूचकांकों का मूल्य बेहद सीमित था.’ लेकिन शोधकर्ताओं ने कहा कि नल के पानी की पहुंच में सुधार करने से अब भी डेंगू के मामलों में कमी लायी जा सकती है, न केवल सीधे प्रभावित लोगों के लिए बल्कि सामान्य आबादी के लिए भी। 

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